एंग्जाइटी अटैक (anxiety attack meaning in hindi) को चिंता का दौरा या घबराहट का दौरा कहते हैं। इसमें अचानक डर, धड़कन बढ़ना, सांस फूलना और पसीना आना जैसे लक्षण दिखते हैं। यह कुछ मिनटों में कम होता है। सही इलाज, थेरेपी और जीवनशैली बदलाव से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
Key Takeaways
- Anxiety के दौरान तेज धड़कन, पसीना, बेचैनी और बार-बार बुरे विचार आने जैसे लक्षण हो सकते हैं।
- Panic Attack में अचानक बहुत तेज डर या घबराहट महसूस होती है, जिसके लक्षण कुछ ही मिनटों में बढ़ सकते हैं।
- तनाव, काम का दबाव, पारिवारिक समस्याएं और नींद की कमी Anxiety को बढ़ा सकते हैं।
- बार-बार घबराहट होने या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने पर Psychiatrist से सलाह लेना मददगार हो सकता है।
Anxiety Attack क्या होता है?
Anxiety Attack एक ऐसी स्थिति का दूसरा नाम है जिसमे किसी को अत्यधिक चिंता या डर या बेचैनी का अनुभव होता है। यह तेज़ दिल की धड़कन, पसीना आना या शांति से रह पाना जैसे कुछ अन्य लक्षणों के साथ जुड़ा हो सकता है। अगर आपके पास किसी महत्वपूर्ण बैठक,परीक्षा,परिवार के मामलों या यहां तक कि बुरे स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं हैं तो आपकी बेचैनी धीरे-धीरे बढ़ सकती है। कभी-कभी आपको ऐसा लग सकता है कि आप भावनाओं और शारीरिक परिवर्तनों को संभालने में असमर्थ हैं।
जो ध्यान रखना ज़रूरी है वह यह है कि अवसादात्मक हमला अपने आप में एक निदानित चिकित्सा स्थिति नहीं है। यह तनाव,अवसादात्मक विकार,एक पैनिक हमला या कभी-कभी किसी शारीरिक समस्या जैसे किसी भी कारण से हो सकता है। बार-बार होने वाले हमलों के मामले में जानना ज़रूरी है कि मूल कारण क्या है।
Anxiety Attack के लक्षण क्या हैं?
एक अवसादात्मक हमले के दौरान आपको मानसिक और शारीरिक दोनों तरह के लक्षण हो सकते हैं। गंभीरता और अनुभव व्यक्ति से व्यक्ति में भिन्न हो सकता है।
Anxiety Attack के शारीरिक लक्षण क्या हैं?
जब कोई चिंता का अनुभव कर रहा होता है तो उसके शरीर में तनाव के प्रतिक्रिया होती है और उसके पास दिल की धड़कन बढ़ने जैसे लक्षण हो सकते हैं,तेज़ सांस लेना या यहां तक की पसीना आना भी हो सकता है।
सामान्य शारीरिक लक्षण हैं:
- एक तेज़ दिल की धड़कन या दिल की धड़कन बढ़ना
- हाथों और पैरों में पसीना आना या कांपना
- तेज़ सांस लेना या सांस लेने में तकलीफ
- सीने में संकुचन या बेचैनी
- धुंधली दृष्टि
- पेट में परेशानी या चक्कर आना
- हाथों या उंगलियों में सुन्नपन और सुन्नपन
ये लक्षण किसी को डरा सकते हैं की कुछ गलत हो रहा है लेकिन यह जरूरी नहीं है की उनकी समस्या चिंता के कारण हो रही हो। हालांकि अगर किसी को पहली बार सीने में दर्द होता है,बेहोशी या सांस लेने में तकलीफ तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेना उचित है।
Anxiety Attack के मानसिक लक्षण क्या हैं?
Anxiety के दौरान आपको बार-बार कुछ बुरा होने का डर लग सकता है और अपने विचारों को शांत करना मुश्किल हो सकता है।
आपको भविष्य की चिंता, किसी समस्या के बारे में लगातार सोचने, ध्यान लगाने में परेशानी या नियंत्रण खोने का डर महसूस हो सकता है। कभी-कभी शरीर में होने वाले बदलाव भी इस डर को बढ़ा देते हैं।
उदाहरण के लिए, अगर आपका दिल तेजी से धड़कने लगे, तो आप सोच सकते हैं कि कहीं आपको कोई गंभीर बीमारी तो नहीं है। इस विचार से घबराहट और बढ़ सकती है।
Anxiety Attack और Panic Attack में क्या अंतर है?
Anxiety आमतौर पर चिंता और तनाव से जुड़ी होती है, जबकि Panic Attack में अचानक बहुत तीव्र डर या घबराहट महसूस होती है।
Anxiety किसी आने वाली परीक्षा, नौकरी, आर्थिक समस्या या पारिवारिक परेशानी को लेकर धीरे-धीरे बढ़ सकती है। इसके विपरीत, Panic Attack में दिल तेजी से धड़कना, पसीना आना, चक्कर आना या नियंत्रण खोने का डर अचानक बहुत बढ़ सकता है।
पैनिक अटैक आमतौर पर कुछ मिनटों में ही अपने चरम पर पहुँच जाते हैं। अटैक के बाद भी जब आप ठीक हो जाते हैं तो आपको थकान या चिंता महसूस हो सकती है। एक ही पैनिक अटैक से पैनिक विकार का पता नहीं चलता है लेकिन अगर आपको लगातार अटैक हो रहे हैं और आपको फिर से एक अटैक होने का डर सता रहा है तो एक मनोचिकित्सक से सलाह लेना सलाह दी जाती है।
Anxiety Attack आने के क्या कारण हैं?
चिंता के कई कारण हो सकते हैं जैसे तनाव,पिछली घटनाएँ,नींद की कमी और यहाँ तक कि कुछ चिकित्सा स्थितियाँ भी हो सकती हैं।इनमे निम्नलिखित शामिल हैं:
- नौकरी/स्कूल से जुड़ा तनाव:काम या परीक्षाओं के निरंतर दबाव में रहना चिंता का कारण बन सकता है।
- परिवार/रिश्ते में तनाव:परिवार में तनाव,रिश्तों में तर्क या वित्तीय चिंताएं किसी व्यक्ति को मानसिक रूप से अशांत बना सकती हैं।
- भविष्य का डर:भविष्य को लेकर निरंतर चिंता या कुछ गलत होने की आशंका चिंता को बढ़ा सकती है।
- पिछले बुरे अनुभव:बुराई से पीड़ित होना या किसी अप्रिय अनुभव से गुजरना या लंबे समय तक तनाव सहन करना कुछ लोगों में चिंता का कारण बन सकता है।
- नींद की कमी/कैफीन का सेवन:नींद की कमी और चाय/कॉफी का अधिक सेवन कुछ लोगों में बेचैनी और बढ़े हुए दिल की धड़कन का कारण बन सकता है।
कभी-कभी शारीरिक चिकित्सा स्थितियाँ या कुछ खास दवाएँ भी इन लक्षणों का कारण बन सकती हैं।इसलिए बार-बार होने वाली घबराहट को नजरअंदाज न करें और इसे केवल तनाव के रूप में न लें।
Anxiety Attack आने पर क्या करें?
चिंतित होने पर धीमी सांस लेना,आपके आस-पास के वातावरण को जानना और एक विश्वसनीय व्यक्ति से बात करना आपको अपने पैनिक अटैक से निपटने में मदद करेगा यहाँ कुछ सरल तरीके हैं:
- धीमी सांस लेना: आराम से बैठें और किसी भी प्रयास के बिना धीरे-धीरे सांस लें और सांस छोड़ें.
- वर्तमान में जागरूक रहें: अपने आस-पास के वस्तुओं के रंग, आकार और ध्वनि को जानें.
- दूसरों से बात करें:अगर आप बहुत ज्यादा उत्तेजित है तो एक विश्वसनीय व्यक्ति से संपर्क करें.
- लक्षणों को नोटिस करें:कोशिश करें कि आपके चिंता अटैक कब और किन स्थितियों में शुरू होते हैं.
यह आपके डॉक्टर को आपकी स्थिति के कारणों का निदान करने में मदद करेगा.
अगर लक्षण नए है या सीने में दर्द, बेहोशी या गंभीर सांस लेने में कठिनाई के साथ है तो बस अपने अटैक को चिंता के रूप में न लें और घर पर न रहें. तुरंत एक डॉक्टर से संपर्क करें.
Anxiety Attack का इलाज कैसे होता है?
चिंता विकारों का इलाज किया जा सकता है। इलाज आपके लक्षणों ,उनकी तीव्रता और उनका आपकी दैनिक गतिविधियों पर प्रभाव इस आधार पर निर्भर करता है।
1.क्या सीबीटी से चिंता का इलाज किया जा सकता है?
हाँ,संज्ञानात्मक व्यवहारिक चिकित्सा (सीबीटी) चिंता विकारों के इलाज का एक व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका है। सीबीटी आपको अपने विचार,भावनाएं और व्यवहार के बीच संबंध समझने में मदद करेगी। उदाहरण के लिए अगर आप हमेशा संभावित बुरे परिणामों के बारे में चिंतित रहते हैं तो चिकित्सा में आप अपने विचारों को समझना सीखेंगे और उन्हें अलग तरह से संभालेंगे।
2.क्या चिंता के हमलों के लिए दवाओं का इस्तेमाल करना ज़रूरी है?
दवाएं हमेशा ज़रूरी नहीं होती हैं। हालाँकि कुछ मामलों में एक मानसिक चिकित्सक आपको कुछ दवाएं लेने का सुझाव दे सकता है। यह सब आपके लक्षणों औरआपकी ज़रूरतों पर निर्भर करता है। दवाओं में कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं और कभी-कभी उन्हें काम करने में कुछ समय लग सकता है। इसलिए दवाओं को लेना, बदलना और बंद करना केवल अपने डॉक्टर से परामर्श के बाद ही करें।
3. क्या Lifestyle Changes से Anxiety कम हो सकती है?
पर्याप्त नींद,व्यायाम,स्वस्थ आहार और अत्यधिक कैफीन के सेवन से बचना चिंता से निपटने में मदद कर सकता है। लेकिन अगर आपको बार-बार पैनिक अटैक हो रहे हैं या आप महसूस करते हैं की आपकी चिंता आपके काम,व्यक्तिगत रिश्तों और सामान्य जीवन को प्रभावित कर रही है तो आपको मनोचिकित्सक से सलाह लेना चाहिए बजाय की आप केवल जीवनशैली में बदलाव करके अपनी चिंता से निपटें।
Anxiety के लिए Psychiatrist से कब मिलना चाहिए?
बार-बार पैनिक अटैक होने पर या जब चिंता आपके काम,अध्ययन,आम गतिविधियों से दूर रहने के लिए बन जाती है तो मनोचिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।
विशेष रूप से निम्नलिखित स्थितियों में:
- आपको बार-बार और अचानक पैनिक अटैक होते हैं।
- आप भविष्य में होने वाले अटैक का लगातार डर महसूस करते हैं।
- चिंता आपको बाहर जाने या लोगों से मिलने से रोकती है।
- लगातार असुविधा आपके काम या अध्ययन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है।
- आप लगातार इस बात का विचार करते हैं की आपको कोई भयानक बीमारी है।
मनोचिकित्सक आपकी स्थिति का कारण निर्धारित कर पाएगा -यह चिंता हो सकती है,पैनिक अटैक या कुछ और।
Jaipur में Anxiety Attack का इलाज
अगर आप जयपुर में रह रहे हैं और आपको अत्यधिक पैनिक अटैक, चिंता या तेज़ दिल की धड़कन जैसी समस्याएं हैं तो सही समय पर एक पेशेवर से सलाह लेना आपके लिए फायदेमंद होगा। जयपुर में एक मनोचिकित्सक डॉ. संजय जैन आपको आपकी समस्या के बारे में मार्गदर्शन कर सकते हैं उसके लक्षणों और आपके दैनिक जीवन पर इसके प्रभाव के बारे में। क्योंकि हर किसी को अलग तरह से चिंता होती है इसलिए उपचार को जरूरत के हिसाब से व्यक्तिगत रूप से बनाना ज़रूरी है। अगर आप खुद को पैनिक अटैक की वजह से बाहर जाने में परेशानी हो रही है काम करने में अध्ययन करने में और दूसरी गतिविधियों में तो अपनी समस्या के बारे में चर्चा करना बहुत मददगार होगा।
निष्कर्ष
अत्यधिक डर, धड़कता हुआ दिल और किसी दुर्भाग्य के घटित होने का लगातार डरावना अनुभव काफी परेशान करने वाला हो सकता है। लेकिन आपको इनसे अकेले ही गुजरने की ज़रूरत नहीं है। चिंता और पैनिक से जुड़ी समस्याओं को समझने और उनका इलाज करने के तरीके हैं। उचित चिकित्सा और निरंतर उपचार के साथ बहुत से लोग अपनी स्थिति से निपट लेते हैं और एक आरामदायक जीवन जीते हैं। अगर आपको बार-बार पैनिक अटैक हो रहे हैं या ये आपकी दैनिक दिनचर्या को प्रभावित कर रहे हैं तो एक मनोचिकित्सक से मिलना एक बहुत ही उपयोगी कदम हो सकता है।
FAQs about Anxiety Attack Meaning in Hindi
Q1. Anxiety attack का हिंदी में क्या मतलब है?
चिंता अटैक एक पैनिक अटैक या चिंता का एक एपिसोड है जिसमें अचानक डर और असुविधा का अनुभव होता है जिसके साथ धड़कता हुआ दिल और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण होते हैं।
Q2. क्या एंग्जाइटी अटैक से जान जा सकती है?
नहीं चिंता या पैनिक अटैक खुद में खतरनाक नहीं होते हैं हालाँकि वे उस समय बहुत डरावने लगते हैं। लेकिन अगर आपने पहले कभी सीने में दर्द का अनुभव नहीं किया है तो आपको अपने दिल की जाँच करवानी चाहिए।
Q3. एंग्जाइटी अटैक कितनी देर रहता है?
ज़्यादातर मामलों में कुछ मिनटों से लेकर लगभग 20 मिनट तक। उसके बाद थकान या बेचैनी का एहसास कुछ देर रह सकता है।
Q4. Anxiety attack और heart attack में फर्क कैसे पहचानें?
दोनों विकारों से छाती के क्षेत्र में दर्द और सांस लेने में समस्याएं होती हैं इसलिए अपने आप किसी निष्कर्ष पर न पहुंचें। जब दर्द आपके हाथ और जबड़े तक फैलता है और आप ठंडे पसीने आने लगते हैं या यह आपका पहला एपिसोड है तो तुरंत आपातकालीन विभाग में जाएँ।
Q5. क्या एंग्जाइटी अटैक पूरी तरह ठीक हो सकता है?
हाँ है लेकिन अगर आप ज़रूरी चिकित्सा या दवाएं लेते हैं और ज़रूरत पड़ने पर अपने जीवनशैली में बदलाव करते हैं तो हो सकता है। आपका परिणाम आपके हाथ में है।
Q6. एंग्जाइटी अटैक के लिए कौन-सा डॉक्टर देखना चाहिए?
सर्वोत्तम विकल्प एक मनोचिकित्सक होगा। पहले आपको एक सामान्य चिकित्सक या कार्डियोलॉजिस्ट से देखना चाहिए ताकि शारीरिक कारणों को बाहर किया जा सके फिर आपको एक मनोचिकित्सक के पास जाना चाहिए आगे के इलाज के लिए।

