IBS पाचन तंत्र से जुड़ा एक क्रोनिक विकार है, जिसमें पेट दर्द, कब्ज, दस्त और सूजन जैसे लक्षण (ibs symptoms in hindi) महसूस होते हैं। इसके मुख्य कारणों में मानसिक तनाव, खराब जीवनशैली, अनहेल्दी डाइट और आंतों की मांसपेशियों में गड़बड़ी शामिल है। यह समस्या महिलाओं में पीरियड्स और एंग्जायटी से जुड़ी हो सकती है, जबकि पुरुषों में अक्सर दस्त और चिड़चिड़ेपन के रूप में दिखती है। इसके मैनेजमेंट के लिए योग, पर्याप्त नींद, फाइबर युक्त आहार और प्रोबायोटिक्स का सेवन बेहद प्रभावी है।
अगर आपको भी सुबह उठते ही पेट भारी लगता है, बार-बार टॉयलेट जाना पड़ता है, कभी कब्ज़ तो कभी दस्त होते हैं और समझ ही नहीं आता कि आखिर पेट को हुआ क्या है, तो ये सारे लक्षण किसी गहरी समस्या की ओर संकेत कर सकते हैं जैसे चिड़चिड़े पेट की समस्या, जिसे हम मेडिकल भाषा में IBS (Irritable Bowel Syndrome) कहते हैं।
National Library of Medicine (NLM) के अनुसार, IBS एक क्रोनिक और दुर्बल करने वाला (Chronic and Debilitating) विकार है जो दुनिया भर की लगभग 9% से 23% आबादी को प्रभावित करता है। Report में यह भी बताया गया है कि gastroenterologist clinic में आने वाले patients का यह सबसे बड़ा उपसमूह है। यह समस्या न केवल आपके शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि आपकी जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) को भी काफी कम कर देती है।
Dr. Sanjay Jain MD-Psychiatry (SMS Medical College and Hospital), NLE (USA), CRA (Singapore) का कहना है की IBS के बढ़ते हुए cases के सबसे बड़े कारण है unhealthy diet और sedentary lifestyle. इसमें दिमाग (Mind) और पेट (Gut) का सीधा कनेक्शन होता है, जिसे Gut–Brain Axis कहा जाता है।IBS एक आम लेकिन confuse करने वाली पेट की परेशानी है, जिसे लोग सालों तक गैस या बदहजमी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
अगर आप या आपका कोई अपना IBS की समस्या से जूझ रहे हैं और इसके बारे में आप गहराई से जानना चाहते हैं तो ये blog आपको detail में बताएगा की IBS क्या हैं(ibs in hindi) (ibs symptoms in hindi), महिलाओं में IBS के लक्षण (ibs symptoms in females), पुरुषों में IBS के लक्षण (symptoms of ibs in men), और इसके इलाज।
IBS क्या है? (IBS in Hindi)
IBS यानी Irritable Bowel Syndrome, आपके पाचन तंत्र (Digestive System) से जुड़ा एक विकार है। यह आपकी बड़ी आंत को प्रभावित करता है। इसमें आपकी आंत की बनावट में कोई खराबी नहीं आती, बल्कि उसके काम करने के तरीके (Function) में गड़बड़ी हो जाती है।
आपकी आंतें एक लय में चलती हैं ताकि खाना पच सके, लेकिन IBS में यह लय बिगड़ जाती है। या तो यह बहुत तेज हो जाती है (जिससे दस्त होते हैं) या बहुत धीमी (जिससे कब्ज होता है)।
IBS को सरल भाषा में समझें तो यह आपके पेट और दिमाग के बीच के signal का तालमेल बिगड़ देती है। जिससे आपको बार बार पेट खराब रहने की समस्या महसूस होती है।
IBS के प्रकार (Types of IBS)

IBS हर किसी के लिए एक जैसा नहीं होता, इसीलिए symptoms के आधार पर इसे चार मुख्य भागों में बांटा गया है, जैसे:
- IBS-C (कब्ज)
इसमें ‘C’ का मतलब है Constipation। इस प्रकार में आपको ज्यादातर समय कब्ज रहता है। मल त्यागने में कठिनाई होती है और पेट हमेशा भरा-भरा या फूला हुआ महसूस होता है।
- IBS-D (दस्त)
यहाँ ‘D’ का मतलब है Diarrhea। इसमें आपको अचानक और बार-बार दस्त होते हैं। अक्सर खाना खाने के तुरंत बाद आपको toilet जाना पड़ता है।
- IBS-M (मिश्रित)
यह ‘Mixed’ प्रकार है। इसमें आपको कभी कब्ज महसूस होगी, तो कभी अचानक दस्त लग जाएंगे। यह काफी परेशान करने वाला होता है क्योंकि आप समझ नहीं पाते कि अगले दिन आपका पेट कैसा behave करेगा।
- IBS-U (Unspecified IBS)
यह उन लोगों के लिए है जिनके लक्षण ऊपर दिए गए तीनों प्रकारों में फिट नहीं बैठते, लेकिन उन्हें IBS की अन्य परेशानियां होती हैं, जैसे पेट के निचले हिस्से में दर्द महसूस होना, या गैस बनना।
IBS Symptoms in Hindi | IBS के सामान्य लक्षण

IBS के symptoms हर किसी को अलग अलग महसूस हो सकते हैं, इनको पहचानना बहुत जरूरी है। आइये जानते हैं इसके कुछ सामान्य लक्षण:
- पेट में दर्द और मरोड़: यह सबसे आम लक्षण है। अक्सर मल त्याग करने के बाद इस दर्द में राहत मिल जाती है।
- पेट फूलना (Bloating): आपको महसूस होगा कि आपका पेट हमेशा गैस से भरा हुआ और टाइट है।
- गैस की समस्या: सामान्य से अधिक गैस बनना और डकारें आना।
- मल में बदलाव: कभी मल बहुत सख्त आता है तो कभी बिल्कुल पानी जैसा पतला।
- अधूरा खालीपन महसूस होना: Toilet जाने के बाद भी ऐसा लगता है कि पेट पूरी तरह साफ नहीं हुआ है।
- म्यूकस (Mucus): मल के साथ सफेद रंग का चिपचिपा पदार्थ (आंव) निकलना।
- थकान और सुस्ती: पाचन ठीक न होने के कारण शरीर को पूरी ऊर्जा नहीं मिलती, जिससे आप थका हुआ महसूस करते हैं।
IBS Symptoms in Females | महिलाओं में IBS के लक्षण
ऐसा माना जाता है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ibs ज्यादा देखने को मिलते हैं। आइये जानते हैं इसके कुछ मुख्य कारण।
- पीरियड्स के दौरान बढ़ते लक्षण: मासिक धर्म के आसपास पेट में दर्द और दस्त की समस्या बढ़ जाती है।
- थकान महसूस होना: महिलाओं में पाचन संबंधी समस्याओं के साथ-साथ क्रोनिक फटीग (बहुत ज्यादा थकान) देखी जाती है।
- पीठ के निचले हिस्से में दर्द: पेट की गड़बड़ी के साथ-साथ कमर के निचले हिस्से में लगातार दर्द बना रहता है।
- नींद की कमी: पेट की बेचैनी के कारण रात में नींद बार-बार टूटती है।
- एंग्जायटी: Hormonal उतार-चढ़ाव के कारण महिलाएं मानसिक रूप से अधिक तनाव महसूस करती हैं।
- पेल्विक पेन: पेट के निचले हिस्से (pelvic area) में भारीपन और दबाव महसूस होना।
- कब्ज की अधिकता: पुरुषों की तुलना में महिलाओं में IBS-C (कब्ज वाला) ज्यादा देखा जाता है।
Symptoms of IBS in Men | पुरुषों में IBS के लक्षण
पुरुषों में IBS थोड़ा अलग हो सकता हैं, हालांकि main symptoms वही रहते हैं।
आइये जानते हैं कुछ सामान्य लक्षण।
- डायरिया का ज्यादा होना: पुरुषों में कब्ज के मुकाबले दस्त (IBS-D) वाले लक्षण अधिक होते हैं।
- खाने के बाद बेचैनी: भारी भोजन या बाहर का खाना खाने के तुरंत बाद पेट में मरोड़ उठना।
- चिड़चिड़ापन: पेट साफ न होने के कारण काम में मन न लगना और स्वभाव में गुस्सा आना।
- काम करने की क्षमता में कमी: पेट की लगातार समस्या के कारण office या physical work में ध्यान लगाने में दिक्कत आती है।
- सीने में जलन: पुरुषों में acid reflux या जी मिचलाने की समस्या भी साथ में देखी जाती है।
- वजन में हल्का बदलाव: बार-बार दस्त होने की वजह से कभी-कभी वजन गिरने लगता है।
IBS होने के कारण (Causes of IBS)

अभी तक medical science किसी एक सटीक कारण तक नहीं पहुँचा है, लेकिन कुछ triggers हैं जो इसे बढ़ावा देते हैं, जैसे:
- आंतों की मांसपेशियों में गड़बड़ी: आंतों का बहुत जोर से या बहुत धीरे सिकुड़ना।
- नर्वस सिस्टम: दिमाग और आंतों के बीच के नर्व signal का ठीक से काम न करना।
- गंभीर इन्फेक्शन: कभी-कभी पेट में गंभीर infection (Gastroenteritis) के बाद IBS शुरू हो जाता है।
- मानसिक तनाव: Stress, anxiety और depression सीधे तौर पर आपके पेट को प्रभावित करते हैं।
- आंतों के बैक्टीरिया में बदलाव: हमारे पेट में अच्छे bacteria होते हैं, इनका संतुलन बिगड़ने से भी IBS होता है।
- फूड सेंसिटिविटी: कुछ लोगों को दूध (Lactose), गेहूं (Gluten) या खास तरह के मसालों से परेशानी होती है। यह भी एक कारण हो सकता है जो IBS को trigger कर सकता है।
तनाव(Stress) IBS को कैसे प्रभावित करता है?
- तनाव बढ़ने पर आंतों की मूवमेंट तेज या धीमी हो जाती है
- इससे दस्त (Diarrhea), कब्ज (Constipation) या दोनों हो सकते हैं
- पेट दर्द, गैस, सूजन और भारीपन बढ़ जाता है
- चिंता, डर, ओवरथिंकिंग से लक्षण और ज्यादा हो जाते हैं
IBS का पता कैसे चलता है? (Diagnosis of IBS)
IBS को पहचानने के लिए कोई एक blood test नहीं है। Doctor आमतौर पर आपकी history देखते हैं।
आइये जानते हैं कुछ सामान्य diagnosis के तरीके:
- लक्षणों का चार्ट: Doctor देखेंगे कि आपके लक्षण कितने महीनों से हैं (आमतौर पर 3-6 महीने)।
- रक्त परीक्षण (Blood Test): कई बार डॉक्टर्स द्वारा blood test भी किया जाता है यह देखने के लिए कि कहीं आपको एनीमिया या सीलिएक (celiac) बीमारी तो नहीं है।
- स्टूल टेस्ट: मल की जांच करके यह सुनिश्चित किया जाता है कि कहीं पेट में इन्फेक्शन या परजीवी तो नहीं हैं।
- लैक्टोज टॉलरेंस टेस्ट: यह देखने के लिए कि कहीं आपको दूध से तो परेशानी नहीं है।
- कोलोनोस्कोपी/एंडोस्कोपी: अगर doctor को किसी गंभीर बीमारी का शक हो, तो वे अंदरूनी जांच की सलाह दे सकते हैं।
IBS का इलाज और मैनेजमेंट (Treatment & Management)
IBS को पूरी तरह खत्म करने वाली कोई specific दवाई या इलाज नहीं है, लेकिन इसे निम्नलिखित तरीकों से 90% तक control किया जा सकता है:
- योग और ध्यान करें: योग, ध्यान (Meditation) और गहरी सांस लेने वाले व्यायाम IBS manage करने में बहुत असरदार हैं।
- पर्याप्त नींद: रोजाना 7-8 घंटे की शांतिपूर्ण नींद लें।
- दवाइयां: Doctor की सलाह से एंटी-डायरियल, लैक्सेटिव या एंटी-स्पास्मोडिक दवाएं ली जा सकती हैं।
- प्रोबायोटिक्स: दही या pro-biotic supplements पेट के अच्छे bacteria को बढ़ाते हैं।
- नियमित व्यायाम: पैदल चलना या हल्की exercise आंतों की गतिशीलता को सुधारती है।
- स्मॉल मील्स: दिन में तीन बार भारी खाना खाने के बजाय 5-6 बार थोड़ा-थोड़ा खाना खाएं।
- पानी का भरपूर सेवन: दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं।
- फाइबर का सही इस्तेमाल: अगर कब्ज है तो फाइबर बढ़ाएं, लेकिन अगर गैस ज्यादा बनती है तो फाइबर धीरे-धीरे बढ़ाएं।
IBS में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?
IBS के management में आपके खाने का सबसे बड़ा रोल है।
आइये जानते हैं IBS के दौरान किस तरह का खाना आपको खाना चाहिए:
- अनाज: चावल (white rice), बथुआ, जई (plain oats), उचित मात्रा में रोटी।
- सब्जियां: गाजर, चुकंदर, पालक, कद्दू, लौकी, तोरी, खीरा (अच्छे से पकी हुई)
- फल: केला, पपीता, संतरा, अनार, तरबूज (उचित मात्रा में)
- Beverages: अदरक की चाय, पुदीने की चाय, herbal teas भी काफी असरकारक है।
- Proteins: मछली, chicken (skinless), eggs, दालें (पकी हुई व उचित मात्रा में)
- Fats: घी (उचित मात्रा में), olive oil खाने में include करें।
- Dairy: दूध की जगह दही या छाछ (अगर suit करे) सेवन भी बहुत अच्छा है।
खाने की चीजें जो आपको avoid करनी चहिये:
- Heavy और oily foods: तला हुआ खाना, पूरी, पकोड़े, समोसे आदि।
- Gas producing foods (गैस बनने वाला खाना): फूलगोभी, पत्तागोभी, राजमा, छोले, सफेद प्याज (कच्चा), लहसुन (excess amount)
- Processed foods (पैकेट वाला खाना ): पैकेट snacks, नूडल्स (noodles), fast food.
- Dairy: फुल क्रीम मिल्क और हैवी क्रीम प्रोडक्ट्स।
- Artificial sweeteners: ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमे अलग से कृत्रिम शुगर डाला गया हो जैसे कोल्ड ड्रिंक्स, कप केक्स या बिस्कुट।
- Spicy foods: बाहर का तला हुआ तीखा खाना तथा या घर के खड़े मसाले।
Conclusion
IBS (ibs symptoms in hindi) को समझना और पहचानना आपकी बेहतर health की दिशा में पहला कदम है। याद रखें कि IBS कोई जानलेवा बीमारी नहीं है, यह एक manageable chronic condition है और तनाव सबसे बड़ा ट्रिगर (Trigger) होता है।।
Dr. Sanjay Jain का मानना है की IBS के लक्षण पुरुषों और महिलाओं में थोड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन proper diet, lifestyle modifications, stress management, और medical guidance से आप normal और productive life जी सकते हैं।
अगर आपको लगातार पेट की तकलीफ हो रही है और अगर यह 3 महीने से ज्यादा समय से चल रही है तो doctor से ज़रूर consult करें। Early diagnosis और appropriate management से आप IBS को effectively control कर सकते हैं और quality life जी सकते हैं।
FAQ
क्या IBS पूरी तरह ठीक हो सकता है?
IBS एक manageable condition है। इसे पूरी तरह जड़ से खत्म करना मुश्किल है, लेकिन lifestyle और diet में बदलाव करके आप बिना किसी लक्षण के सामान्य जीवन जी सकते हैं।
क्या IBS महिलाओं में ज्यादा होता है?
हाँ, महिलाओं में पुरुषों की तुलना में IBS की समस्या थोड़ी ज्यादा पाई जाती है। इसका कारण estrogen और progestorone जैसे hormone का उतार-चढ़ाव माना जाता है।
क्या IBS तनाव से बढ़ता है?
बिल्कुल! हमारे पेट और दिमाग के बीच एक गहरा संबंध होता है। जब आप तनाव में होते हैं, तो आपकी आंतें अधिक संवेदनशील हो जाती हैं, जिससे IBS के लक्षण अचानक बढ़ सकते हैं।
IBS और गैस में क्या फर्क है?
गैस एक सामान्य प्रक्रिया है जो गलत खान-पान से कभी-कभी होती है। लेकिन अगर गैस के साथ पेट में तेज दर्द, दस्त या कब्ज की समस्या हफ्तों तक बनी रहे, तो वह IBS हो सकता है।



